बदनाम करते हैं लोग मुझे जिसके नाम से.,
कसम खुदा की जी भर के कभी उसको देखा भी नहीं.,
.....................................................
रब किसी को किसी पर फ़िदा ना करे.
करे तो कयामत तक जुदा ना करें.,
यह माना की कोई मरता नहीं जुदाई में.
लेकिन जी भी नहीं पाता तन्हाई में,.
....................................................
बरसों के बाद होती है मुलाकात.
फिर भी रहती है दिल में दिल की बात.,
नज़रों से करना पड़ता है प्यार.
पर नजर मिलाने के लिए भी करना पड़ता है इंतजार,,
कसम खुदा की जी भर के कभी उसको देखा भी नहीं.,
.....................................................
रब किसी को किसी पर फ़िदा ना करे.
करे तो कयामत तक जुदा ना करें.,
यह माना की कोई मरता नहीं जुदाई में.
लेकिन जी भी नहीं पाता तन्हाई में,.
....................................................
बरसों के बाद होती है मुलाकात.
फिर भी रहती है दिल में दिल की बात.,
नज़रों से करना पड़ता है प्यार.
पर नजर मिलाने के लिए भी करना पड़ता है इंतजार,,

